यह धुआँ है कुआं
काली रोशनी का
काली चाशनी का
होंट काले मुँह मे छाले
घुलते ज़हर सौ दर्द वाले
थोढा धुआँ मैंने पीया
थोढी उमर थोढा जीया
उजले रंग का काला ज़हर
तेजाबी असर वाला जहर
कोई खला कोई बला
इस धूऐ मे बह चला
फेफड़े वो काले हुए
केकडे वो पाले हुए
आहिस्ता से दिल खरोचे
गम क्या बुरा था अब यह भी नोचे
छोटी उमर सारा जहर
छूटा नहीं पर प्यारा जहर
हाँतो के वो पीले निशान
गाड़े लहू के सीले निशान
परेशान थी दो उंगलियाँ
काँपती थी करती चुगलियाँ
सूखा गला सूखा चला
धुँआ बनाने बस्ती जला
उस बस्ती मे मैं भी पला
बस्ती संग मैं भी जला
करता असर मीठा जहर
मरता बदन जीता जहर
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this is too good.. as usual awesome.
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ReplyDeleteSubject is very eyecatching and words choosen are as usual very nice.
ReplyDeleteAppropriate climax.
Overall very gud effort, but I am still expecting a bit better word arrangement which is of course easier said than done.
http://rahulnow.weebly.com/