Saturday, September 12, 2009

No Smoking

यह धुआँ है कुआं
काली रोशनी का
काली चाशनी का
होंट काले मुँह मे छाले
घुलते ज़हर सौ दर्द वाले
थोढा धुआँ मैंने पीया
थोढी उमर थोढा जीया
उजले रंग का काला ज़हर
तेजाबी असर वाला जहर

कोई खला कोई बला
इस धूऐ मे बह चला
फेफड़े वो काले हुए
केकडे वो पाले हुए
आहिस्ता से दिल खरोचे
गम क्या बुरा था अब यह भी नोचे
छोटी उमर सारा जहर
छूटा नहीं पर प्यारा जहर

हाँतो के वो पीले निशान
गाड़े लहू के सीले निशान
परेशान थी दो उंगलियाँ
काँपती थी करती चुगलियाँ
सूखा गला सूखा चला
धुँआ बनाने बस्ती जला
उस बस्ती मे मैं भी पला
बस्ती संग मैं भी जला
करता असर मीठा जहर
मरता बदन जीता जहर